कलम के सिपाही प्रेमचंद के जन्मदिवस के अवसर पर….

महान साहित्यकार प्रेमचन्द के जन्मदिवस (31 जुलाई) के अवसर पर उनका महत्वपूर्ण लेख पढ़ें!   साम्प्रदायिकता और संस्कृति साम्प्रदायिकता सदैव संस्कृति की दुहाई दिया करती है। उसे अपने असली रूप में निकलने में शायद लज्जा आती है, इसलिए वह उस गधे की भाँति जो सिंह की खाल ओढ़कर जंगल में जानवरों पर रोब जमाता फिरता था, संस्कृति का खोल ओढ़कर आती है। हिन्दू अपनी संस्कृति को क़यामत तक सुरक्षित रखना चाहता है, मुसलमान अपनी संस्कृति को। दोनों ही अभी तक अपनी-अपनी संस्कृति को अछूती समझ रहे हैं, यह भूल गये…