नोटबंदी से असली काला धन वाले कारोबारियों को ना तो कुछ नुकसान होने वाला है ना ही इनका काले धन का चोरी का कारोबार रुकने वाला है। अगर इनके पास तात्कालिक ज़रूरत के लिए कुछ नोट इकठ्ठा हों भी तो भी राजनेताओं, अफ़सरों, पुलिस, वित्तीय व्यवस्था में इनका रुतबा और पहुँच इतनी गहरी है कि उन्हें खपाने में इन्हें कोई ख़ास दिक्कत नहीं आयेगी। भारत की 84 प्रतिशत सम्पत्ति के मालिक सिर्फ 20 प्रतिशत लोग हैं जबकि शेष 80 प्रतिशत के पास सिर्फ़ 16 प्रतिशत सम्पत्ति है। क्या 20 प्रतिशत अमीर लोगों के बजाय इन 80 प्रतिशत ग़रीबों के पास काला धन है? लेकिन इन 80 प्रतिशत लोगों की आमदनी नकदी में है, इनके पास 500 या 1000 के नोट भी हैं और अब इन्हें इनको बदलने में सिर्फ़ तकलीफ़ ही नहीं उठानी पड़ रही बल्कि इन्हें लूटा भी जा रहा है।
Author: नौजवान भारत सभा
क्रान्तिकारी जनजागरूकता-जनएकजुटता सप्ताह – अशफ़ाक उल्ला खाँ अमर रहें! गणेशशंकर विद्यार्थी अमर रहें!! यतीन्द्रनाथ दास अमर रहें!!!
इन शहीदों को याद करना हमारे लिए आज मौजूदा लूट व अन्याय पर टिकी व्यवस्था के खिलाफ एक नए क्रान्तिकारी आन्दोलन को शुरू करने का ऐलान है। युवाओं को तमाम भ्रष्ट चुनावी पार्टियों व धार्मिक कट्टरपन्थी संगठनों का झन्डा धूल में फेंक देना चाहिए और ‘समान शिक्षा-सबको रोजगार’ का झन्डा अपने हाथ में उठा लेना चाहिए। पानी, बिजली, स्वास्थ्य आदि के मुद्दे पर आम जनता को गोलबन्द करना चाहिए। बेहतर विचारों, बेहतर आदर्शों को खुद आत्मसात करना चाहिए व देश के एक-एक इंसान तक पहुँचाने की मुहिम में जुट जाना चाहिए। अपने शहीदों के समता व न्याय पर टिके समाज के सपने को पूरा करने के लिए मैदान में उतर जाने के लिए यह परचा तमाम युवाओं को एक आमंत्रण है। क्या आप तैयार हैं?
नौभास का प्रथम जिलास्तरीय सम्मेलन (जिला-सिरसा)
सम्मेलन में जिले की नई नेतृत्व कमेटी का चुनाव किया गया तथा पदाधिकारी चुने गए। नौ.भा.स की जिला सिरसा की अलग-अलग ईकाईयों में से कुल 80 प्रतिनिधि उपस्थित थे। इसी मौके पावेल (कालांवाली), दिलबाग सिंह(नकोड़ा), वकील सिंह (रोड़ी), सतपाल सिंह (औढाँ) तथा अमनदीप सिंह (संतनगर) को नई जिला कमेटी के सदस्यों के तौर पर चुना गया। जिला कमेटी ने सेक्रेटरी की भूमिका पावेल तथा कोषाध्यक्ष की भूमिका अमनदीप को सौंपी।
ख़त्म करो पूँजी का राज! लड़ो बनाओ लोकस्वराज्य!
सात दशकों के आज़ाद भारत में किसे क्या मिला? किसकी कोठियाँ और बंगले खड़े हो गये और कौन मुफ़लिसी की ज़िन्दगी बिता रहा है? यह किसकी आज़ादी है? कौन हर स्वतन्त्रता दिवस और गणतन्त्र दिवस पर आज़ादी का जश्न मना रहा है और कौन झुग्गी-बस्तियों और झोपड़ियों में अपने हालात का मातम मना रहा है?
शहीदे-आज़म भगतसिंह के 109 वें जन्मदिवस के अवसर पर ‘शहीद यादगारी यात्रा’
भगतसिंह का मानना था कि अंग्रेजों को देश से भगाने के साथ ही देशी लुटेरों को भी उखाड़ फेंकना होगा। ऐसा समाज बनाना होगा जिसमें एक आदमी द्वारा दूसरे आदमी का शोषण न हो, अमीरी-गरीबी की खाईं न हो, धर्म-जाति-क्षेत्र के नाम पर दंगे-फसाद न हों, स्त्री-पुरुष समानता हो, मेहनत करने वाले लोग रहने-खाने-पहनने सहित शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, मनोरंजन आदि की सुविधायें हासिल कर सकें। हर इंसान को गरिमा-सम्मान के साथ जीवन जीने का मौका मिले।
बिना क्रान्ति जाति उन्मूलन सम्भव नहीं! बिना जाति-विरोधी संघर्ष क्रान्ति सम्भव नहीं!
आज देश भर में मेहनतकश दलित आबादी भी संघी फासीवादियों के अत्याचारों के खिलाफ़ चुप नहीं बैठ रही है। उसने केवल संविधान और सरकार के भरोसे रहने, रियायतें माँगने और सुधारवाद के भरोसे रहना बन्द कर दिया है। गुजरात में मेहनतकश दलितों ने सम्मान और समानता के हक़ के लिए जो जंग छेड़ी है वह शानदार है। आज देश के मेहनतकश ग़रीब दलित मज़दूर और आम मेहनतकश यह समझ रहा है कि इंक़लाब के अलावा कोई रास्ता नहीं है।
‘गौ-रक्षा दल’ द्वारा गुजरात में दलितों पर बर्बर अत्याचार के खिलाफ आव़ाज उठाओ!!
दलित युवाओं को पीटे जाने की इस घटना से यह साफ हो जाता है कि अगर आर.एस.एस. और भाजपा अपनी हिंदुत्ववादी फासीवादी एजेंंडे को लागू करने में पूरी तरह सफल हो गयी तो दलितों की जिन्दगी कैसी होगी। और यहाँ बात सिर्फ दलितों तक ही सीमित नहीं है। इसी तरह गोमांस की अफवाह फैलाकर अखलाक नाम के एक व्यक्ति को पीट-पीटकर मार डालने वाले भी यही कट्टरपंथी ताकतें थी। ये फासीवाद हमेशा कमजोर तबकों के खिलाफ होता है, चाहे वे दलित हों, अल्पसंख्यक हों या महिलायें हों।
फिर चुनाव! बार-बार कब तक ठगे जायेंगे … उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (नौभास द्वारा जारी पर्चा)
इतने सालों के इंतजार के बाद भी अगर हम चुनावी मदारियों के भरोसे बैठे रहे तो हम अपनी आने वाली पीढियों के लिए भुखमरी, बेरोजगारी, गरीबी का दलदल छोड़ जायेंगे। एक कब्रिस्तान छोड़ जायेंगे जहाँ चारों तरफ बस मुर्दा शान्ति होगी। अगर हम जीवित हैं, इंसाफपसंद हैं तो आइये! उठ खड़े हों! जाति-धर्म, क्षेत्र के झगड़े भुलाकर फौलादी एकता बनाएं और इन 15 फीसदी परजीवियों को धूल चटा दें।
कौन देशभक्त? कौन देशद्रोही? इतिहास के मिथ्याकरण के विरुद्ध!
आज हमारे लिए संघ-भाजपा के ‘राष्ट्रवाद’ और इसकी तथाकथित ‘देशभक्ति’ की असलियत को पहचानने की जरूरत है। और उसके साथ ही देश की आजादी के लिए शहीद होने वाले सच्चे ‘देशभक्तों’ की क्रान्तिकारी विरासत को जानने समझने की भी जरूरत है। हमें एक उन्मादी देश-भंजक भाजपा-संघी ‘राष्ट्रवाद’ नहीं बल्कि जनता के भाईचारे, आजादी और जनता के जनवादी अधिकारों वाले समाज की जरूरत है। आज हर एक इंसाफपसन्द नौजवान, नागरिक और स्त्री-पुरुष के लिए संघ-भाजपा के असल चेहरे को देखने की जरूरत है क्योंकि ये हमारी आँखों के सामने ही हर झूठ को सौ बार दोहरा कर सच बनाना चाहते हैं।
सावधान! सावधान! सावधान! ज़हरखुरानी गिरोह से सावधान!
पहले इस गिरोह को चड्ढी गेंग या कच्छा-बनियान गिरोह नाम से जाना जाता था लेकिन विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि अब यह अपना चोला बदलने की फ़िराक में है। हर ख़ासो-आम को आगाह किया जाता है कि नई पैकिंग से धोखा न खायें क्योंकि अन्दर का माल वही है।