फ़िलिस्तीनी अवाम का मुक्ति संघर्ष ज़िन्दाबाद!!
जॉर्डन नदी से भूमध्य सागर तलक,
आज़ाद होगा फ़िलिस्तीनी मुल्क!

फ़िलिस्तीनी अवाम का मुक्ति संघर्ष अपनी ज़मीन, इन्साफ़ और आज़ादी के लिए है। यह संघर्ष महज़ पन्द्रह महीने पुराना नहीं है बल्कि क़रीब आठ दशक पुराना है। 1948 से पहले इज़रायल नाम का कोई देश दुनिया के नक्शे पर नहीं था। जिस देश को आज इज़रायल का नाम दिया जा रहा है वह वास्तव में फ़िलिस्तीन का कब्ज़ा किया हुआ हिस्सा ही है। फ़िलिस्तीन की जगह-ज़मीन पर इज़रायल नामक सेटलर कॉलोनी को बसाने की योजना 1908 में मध्य-पूर्व में तेल के खदान मिलने के बाद बनी। तेल पश्चिमी साम्राज्यवाद के लिए सबसे रणनीतिक माल बन गया और इसपर ही अपना क़ब्ज़ा जमाने के लिये ज़ायनवादी उपनिवेशवादी व नस्ली श्रेष्ठतावादी राज्य की स्थापना, फ़िलिस्तीनी जनता को उनकी ज़मीन से बे-दख़ल करने के रूप में शुरू हुई। इसके लिए ब्रिटेन ने ज़ायनवादी हत्यारे गिरोहों को फ़िलिस्तीन ले जाकर बसाना शुरू किया, उन्हें हथियारों से लैस किया और फिर 1917 से 1948 तक के बीच हज़ारों फ़िलिस्तीनियों का इन ज़ायनवादी धुर-दक्षिणपन्थी गुण्डा गिरोहों द्वारा क़त्लेआम किया गया और लाखों फ़िलिस्तीनियों को उनके ही वतन से बे-दख़ल करने का काम शुरू हुआ। बाद में अमेरिकी साम्राज्यवाद की सरपरस्ती में इज़रायली ज़ायनवादियों द्वारा यह काम अंजाम दिया गया। यह प्रक्रिया अपने सबसे बर्बर रूप में आज भी जारी है। इसलिए इज़रायल कोई वास्तविक देश नहीं है बल्कि यह एक सेटलर उपनिवेशवादी कॉलोनी है जो मध्य-पूर्व में पश्चिमी साम्राज्यवाद के हितों, विशेषकर तेल से जुड़े रणनीतिक हितों और उनके मुनाफ़े की हिफ़ाज़त के लिए खड़ा किया गया है।
हालिया 460 दिनों तक चले युद्ध ने फ़िलिस्तीन के एक बड़े हिस्से को मलबे में तब्दील कर दिया विशेष तौर पर गाज़ा को तहस-नहस कर दिया है। इसके 2.3 मिलियन लोगों में से लगभग 90% लोग विस्थापित हो गये। गाज़ा के स्वास्थ्य मन्त्रालय की रिपोर्ट के अनुसार इस नरसंहार में लगभग 50,000 फ़िलिस्तीनी मारे गये हैं और 1 लाख से भी ज़्यादा घायल हुए हैं। मरने वालों में आधे से ज़्यादा महिलाएँ और बच्चे थे। फ़िलिस्तीन का हर गली, हर कोना इस ज़ुल्म के ख़िलाफ़ गवाही दे रहा है। लेकिन फ़िलिस्तीनी जनता का हौसला और उनकी जिद यह साबित करती है कि वह अपनी आज़ादी के लिए आख़िरी सांस तक खड़े रहेंगे।ज़ायनवादी इज़रायली उपनिवेशवादी न केवल फ़िलिस्तीनी जनता के दुश्मन हैं बल्कि ये पूरी दुनिया के, सारी दमित-शोषित जनता के दुश्मन हैं।
नौजवान भारत सभा फ़िलिस्तीनी अवाम के मुक्ति संघर्ष का पुरजोर समर्थन करता है और उसके दमन का विरोध करता है। इसके साथ ही माँग करता हैं कि मोदी सरकार ज़ायनवादी इज़रायल के साथ अपने सभी व्यापारिक सम्बन्धों को फ़ौरन ख़त्म करे और ज़ायनवादी इज़रायल का प्रतिरोध कर रही फ़िलिस्तीनी जनता के मुक्ति संघर्ष का समर्थन करे।