अब थोड़ा भी इंतजार हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत घातक होगा। आज़ादी के जिस पौधे को भगतसिंह जैसे महान शहीदों ने अपने रक्त से सींचा था वो मुरझा रहा है। इन शहीदों का सपना हमारी आँखों में झांक रहा है। आइये इन शहीदों के सपनों के भारत के निर्माण के संघर्ष में प्राण-प्रण से जुट जांय।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में चलाया गया ‘क्रान्तिकारी नवजागरण अभियान’
‘क्रान्तिकारी नवजागरण अभियान’ के पीछे का मक़सद आज के समय में भगतसिंह के सपनों पर आधारित समाज को बनाने के लिए एक नए इन्क़लाब का ऐलान है. भगतसिंह का सपना गोरे अंग्रेजों के जाने के बाद भूरे अंग्रेजों को सत्ता में बैठा देने का नहीं था बल्कि एक ऐसे समाज के निर्माण का था जो बराबरी और न्याय पर टिका हो, जहाँ एक इंसान द्वारा दूसरे इंसान को लूटा जाना असंभव बना दिया जाय. लेकिन आज़ादी के 68 सालों का इतिहास भूरे साहबों की लूट को आज नंगे रूप में सामने ला चुका है. नौजवान भारत सभा के कार्यकर्ताओं ने तमाम इंसाफपसंद नागरिकों और नौजवानों का आह्वान किया कि वे भूरे साहबों की लूट पर टिकी व्यवस्था को जड़ से उखाड़ कर इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दे और देश की करोड़ों की मेहनतकश आबादी को संगठित करने में लग जायं ताकि इस सदी में भगतसिंह और दूसरे तमाम क्रांतिकारियों के सपनों को साकार किया जा सके.
सच्चे देशभक्तों को याद करो! नकली “देशभक्तों” की असलियत को पहचानो!
इस नफ़रत की सोच से अलग हटकर, ठहरकर एक बार सोचिये कि 2 लाख करोड़ रुपये का व्यापम घोटाला करने वाले, घोटाले के 50 गवाहों की हत्याएँ करवाने वाले, विधानसभा में बैठकर पोर्न वीडियो देखने वाले, विजय माल्या और ललित मोदी जैसों को देश से भगाने में मदद करने वाले देशभक्ति और राष्ट्रवाद का ढोंग करके आपकी जेब पर डाका और घर में सेंध तो नहीं लगा रहे? कहीं ये ‘बाँटो और राज करो’ की अंग्रेज़ों की नीति हमारे ऊपर तो नहीं लागू कर रहे ताकि हम अपने असली दुश्मनों को पहचान कर, जाति-धर्म के झगड़े छोड़कर एकजुट न हो जाएँ? सोचिये साथियो, वरना कल बहुत देर हो जायेगी! जो आग ये लगा रहे हैं, उसमें हमारे घर, हमारे लोग भी झुलसेंगे। इसलिए सोचिये!
ATS and police raid for distributing anti-RSS pamphlets
Naujawan Bharat Sabha is commited to carry forward the legacy of the great revolutionaries and therefore,has been continuously waging struggle against the hateful propaganda of the communal groups.Precisely,because of this, the members of this organisation have been getting continuous threats from such groups. A few days back the activists of NBS had distributed some pamphlets (Pamphlet link – http://naubhas.com/archives/445
शहीद यादगारी यात्रा
नौजवान भारत सभा की उत्तर-पश्चिमी दिल्ली इकाई द्वारा चलाई जा रही के तहत आज चौदहवें दिन रोहिणी के सेक्टरों 15, 16, 17, 18, 19 और बादली में शहीद झांकी का जुलूस निकाला गया।जुलूस के दौरान जगह-जगह नुक्कड़ सभाएं करते हुए व्यापक स्तर पर पर्चा वितरण किया गया। सेक्टर 16 के डिस्ट्रिक्ट पार्क में श्रद्धांजलि सभा में भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव की तस्वीरों पर माल्यार्पण करके आज शहीद यात्रा के एक पड़ाव की समाप्ति की घोषणा की गई। सभा में बात रखते हुए नौभास के अपूर्व ने कहा कि भगतसिंह की…
Naujawan Bharat Sabha Manifesto and Constitution
Introduction We are presenting the manifesto and constitution of a revolutionary youth organization named ‘Naujawan Bharat Sabha (नौजवान भारत सभा)’ before the revolutionary and progressive youth of this country. The aim of this organization is to unite the scattered youth movement of the country on the basis of the understanding of a right direction and to take it forward as an integral part of the struggle of the broad masses against imperialism-capitalism. ‘Naujawan Bharat Sabha’ was formed in 2005 and the draft manifesto and the draft constitution were presented before…
शहीद चन्द्रशेखर आजाद के 85वें शहादत के अवसर पर शिक्षा-रोजगार अधिकार रैली !
शहीद चन्द्रशेखर आजाद के 85वें शहादत के अवसर पर शिक्षा-रोजगार अधिकार रैली ! 28 फरवरी। नरवाना, नौजवान भारत सभा ने शहीद चन्द्रशेखर आजाद के 85 वें शहादत के अवसर पर शिक्षा-रोजगार अधिकार रैली का आयोजन किया। रैली नेहरू पार्क से शुरू होकर , शहर भर में नुक्कड सभा करते हुए शहीदेआजम लाईब्रेरी पहुॅंची। नौभास के रमेश ने बताया की 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फे्ड पार्क में अंग्रेजों की गोलियों का मुकाबला करते हुए शहीद चन्द्रनशेखर आजाद का नाम बेमिसाल कुर्बानी का ही प्रतीक नहीं है बल्किं आजाद का…
अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद के शहादत दिवस (27 फरवरी) पर जारी पर्चा
चन्द्रशेखर आज़ाद जैसे क्रान्तिकारियों के लिए देश का मतलब उसमें रहने वाले करोड़ों मेहनतकश लोगों से था। आज़ाद अन्धराष्ट्रवादी नहीं थे। वो अपने देश के अलावा पूरी दुनिया के मेहनती लोगों से प्यार करते थे और अपने देश व पूरी दुनिया के शोषकों से नफरत करते थे। आज़ाद उन लोगों में नहीं थे जो बात-2 पर ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाते हैं और हकीकत में अपने थोड़े लाभ के लिए देश की जनता और प्रकृति को नुकसान पहुँचाने वाले चुनावी पार्टियों के आगे-पीछे घूमते हैं। आज़ाद उनमें से नहीं थे जो देश की जनता के लिए दुःख उठाने की बात आते ही बिल में घुस जाते हैं। आज़ाद वो देशप्रेमी और दुनियाप्रेमी थे जो अपने देश व पूरी दुनिया में आम जनता के जीवन की बेहतरी के लिए अपनी ज़िन्दगी को कुर्बान तक कर देने का माद्दा रखते थे। वो अपनी बात पर सौ प्रतिशत खरे उतरे।
जेएनयू-विरोधी गोलबन्दी की आरएसएस की साज़िशाना मुहिम
कौन देशभक्त है और कौन देशद्रोही?
अगर हम आज ही हिटलर के अनुयायियों की असलियत नहीं पहचानते और इनके ख़िलाफ़ आवाज़ नहीं उठाते तो कल बहुत देर हो जायेगी। हर जुबान पर ताला लग जायेगा। देश में महँगाई, बेरोज़गारी और ग़रीबी का जो आलम है, ज़ाहिर है हममें से हर उस इंसान को कल अपने हक़ की आवाज़ उठानी पड़ेगी जो चाँदी का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुआ है। ऐसे में हर किसी को ये सरकार और उसके संरक्षण में काम करने वाली गुण्डावाहिनियाँ“देशद्रोही” घोषित कर देंगी! सोचिये दोस्तो और आवाज़ उठाइये, इससे पहले कि बहुत देर हो जाये।